Skip to main content

सबसे बड़ा हिंदूवादी कौन,कांग्रेस या भाजपा! फिर सेक्युलर कौन?


आज की राजनीति में कौन असली है ,कौन नकली पहचान करना मुश्किल हो रहा है। गुजरात चुनाव की बात करें  यहाँ दोनों राष्ट्रीय दल एक दूसरे से बड़ा हिन्दुवत्त्ववादी  दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। और एक दूसरे पर साम्प्रदायिक राजनीति करने आरोप लगाया जा रहा है। अब हम यहीं से अपनी बात शुरू करते हैं की कौन दल कितना सेक्युलर है ,साम्प्रदायिक  है या फिर दोनों पाक साफ़ हैं । बीजेपी का जन्म ही धार्मिक पृष्ठभूमि से हुई है। इसके विस्तार में भी धार्मिक आंदोलन की अहम भूमिका रही है। जब देश में मण्डल की राजनीति हावी थी ,ठीक उसी समय मण्डल को काटने का कार्य कमण्डल ने किया । 1984 में 02 सीटों वाली बीजेपी कमण्डल के बल पर 1989 में नौंवी लोकसभा में 85 सांसद सदन में पहुंचने में कामयाब हुए। वर्तमान में 285 सांसदों के साथ पूर्ण बहुमत से सत्ता पर काबिज है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी जो देश पर 60 वर्ष से राज किया आज सत्ता से दूर हो गई है। जरा कांग्रेस की भी बात करते हैं जो बीजेपी को हिंदूवादी व साम्प्रदायिक बताने वाली पार्टी सोमनाथ मंदिर का संसद में बिल पास कर पुनर्निर्माण कराया तो वहीं बाबरी विवादित ढांचा पर 1949 में ताला जड़वा दिया गया। जबकि इसे हल भी किया जा सकता था। लेकिन इस मामले को जिन्दा रखा गया। इन्ही की सरकार में ताला खुला तो इन्ही की केंद्र सरकार के समय ढांचे को कारसेवकों आज से 27 वर्ष पूर्व 06 दिसम्बर 1992 को ढहा दिया गया। इन्होंने ने ही शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था।  इनके ही प्रधानमंत्री मंत्री ने देश के संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक़ बताया था। मुस्लिमों को अलग से आरक्षण की वकालत किया था। आज गुजरात में राहुल गांधी मंदिरों में पूजन अर्चना कर रहे हैं ,उन्हें जनेऊधारी हिन्दू की उपाधि दी जा रही है। क्या वहाँ  मस्जिद ,गुरुद्वारा,चर्च ,नही हैं।  यूपी चुनाव में मंदिर नही दिखता था मस्जिद दिखते  थे। जातिवादी नेताओं के बल पर चुनावी वैतरणी पार करने के फ़िराक में हैं। रामजन्मभूमि विवाद केस में कांग्रेस के बरिष्ठ नेता व सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील का सुप्रीम कोर्ट में ये दलील देना की 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद सुनवाई हो ,ये क्या दर्शा रहा है ! कांग्रेस पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। अब बीजेपी पर भी बात करते हैं।जिस धर्म की सीढ़ी पर ये पार्टी सत्ता पर आयी उसके अनुवाइयों की आस्था का केंद्र राम मंदिर के लिए पूरे मनोयोग से जुटना चाहिये। जिससे हिंदुओं का आस्था व विश्वास की रक्षा हो सके। क्योंकि अब अधिक दिन बरगला कर वोट नही लिया जा सकता है। अब तक अब समझ गये होंगे कि कौन साम्प्रदायिक है और कौन सेक्युलर है। सच तो यही दोनों ही अपनी अपनी राजनीति की रोटी सेंकने के लिए जरूरत के मुताबिक सेक्युलर बन जाते हैं और सांप्रदायिक भी बनने में देर नही लगाते हैं।  उपरोक्त उदाहरणों से यही निष्कर्ष निकलता कि जिसे हम सबसे बड़ा सेक्युलर की उपाधि देते हैं ,वास्तव में वो ही अप्रत्यक्ष रूप से सबसे बड़ा साम्प्रदायिक होता है। और जिन्हें हम सांप्रदायिक सांप्रदायिक कहते नही थकते वास्तव में वे ही अप्रत्यक्ष रूप से अच्छे सेक्युलर साबित होते हैं।
@NEERAJ SINGH

Comments

Popular posts from this blog

भारत की राजनीति में प्रियंका गांधी !

भारतीय राजनीति में कांग्रेस की तरफ से एक और गांधी की एंट्री हुई है ,नाम है प्रियंका गांधी । कभी रिश्तो की डोर लेकर अमेठी की राजनीति में सरगर्मी मचाने वाली कभी मां के चुनाव की कमान संभालती तो कभी भाई राहुल गांधी के चुनाव की कमान संभालने का कार्य प्रियंका गांधी करती थी । प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से उनका नाता राजनीति से जुड़ा रहा है और अक्सर कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में आने के लिए दबाव बनाया जाता रहा है या फिर मीडिया कि लोग जब पूछते कि आप कब आ रही हैं सक्रिय राजनीति में तब जबाब में बस मुस्कुरा कर आगे निकल जाती थी । आज वही प्रियंका गांधी भाई के साथ कदम से कदम मिलाने की सोच लेकर भारतीय राजनीति में आ चुकी हैं । ऐसा नहीं है कि राजनीति में पहली बार आई हैं, मां और भाई के चुनाव को बखूबी संभालती थी इतना ही नहीं उनकी सीटों के अलावा आसपास के जिलों की सीटों में प्रचार भी किया था।  अब तक कितना डंका इनका बज चुका है यह तो पिछले इतिहास को देख कर ही पता चलता है ।लेकिन एक बात तय है कांग्रेस जिस हाल में आज खड़ी है प्रियंका गांधी कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी…

जवानों की शहादत से घायल कश्मीर

किसी शायर ने कश्मीर की समस्या पर शायराना अंदाज में कहा.... ये मसला दिल का है , हल कर दे इसे मौला। ये दर्द-ए- मोहब्बत भी, कहीं कश्मीर ना बन जाए।। कवि ने इन कविता की लाइनों में कश्मीर के दर्द को बयां किया है कि कश्मीर का मसला ना सुलझने वाला मसला बनकर रह गया है। देश का कभी सिरमौर कहा जाने वाले कश्मीर को आतंक रूपी एक नासूर रोग लग चुका है। देश आजाद होने के बाद कश्मीर का दो भाग हुआ। जिसमें पाकिस्तान वाले हिस्से को पीओके कहा गया यानी कि पाक अधिकृत कश्मीर , वहीं भारतीय हिस्से को कश्मीर कहा गया गया। सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों का भारत में मिलाया । केवल यही एक इकलौता राज्य रहा जिसे 35 ए, 370 धारा के तहत विशेष दर्जा के साथ भारत मे शामिल किया गया । एक अलग संवैधानिक अधिकार दिया गया । लेकिन यही विशेष अधिकारों का प्रतिफल रहा कि कश्मीर का एक तबका धीरे-धीरे इसे अपना सर्वोच्च अधिकार मानने लगा और इसी का परिणाम हुआ कश्मीर में एक अलग गुट उभर कर आया। जिसे अलगाववादी गुट कहा जाता है । अगर इस गुट को को पाक परस्त गुट कहा जाए तो अशियोक्ति नहीं होगी। देश व प्रदेश की सरकारों की नीतियों पर भी कश्मी…

सावधान! होली का रंग, ना हो जाए बदरंग

मौज मस्ती का त्यौहार होली को लेकर बच्चे या युवा या फिर हो बूढ़े सब पर एक ही रंग चढ़ा रंग चढ़ा होता है वह है मस्ती इस त्यौहार को लेकर लोगों में विशेषकर युवाओं बच्चों में उमंग व में उमंग व उत्साह देखते ही बनता है। होली के दिन रंगोली की तरह रंगा हुआ होता है। लेकिन जिन रंगों का हम प्रयोग प्रयोग करते हैं । उसको लेकर क्या हम सोचते हैं कि यह रंग हमारे शरीर को कितना नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। नहीं इसका अनुमान लोगों को कम ही रहता है। इसलिए इन रासायनिक रंगों से बचने की आवश्यकता है। क्योंकि यह जितना ही हानिकारक होता है , उतना ही प्राकृतिक रंग हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। इसलिए रासायनिक रंगों के प्रति सावधानी बरतना अति आवश्यक है । जहां एक तरफ फलों सब्जियों व फलों के रंग सेहत के के लिए लाभकारी होते हैं । वहीं रासायनिक रंग सेहत के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं । क्या हैं प्राकृतिक रंगों से स्वास्थ्य के लिए लाभ अब हम बात करते हैं प्राकृतिक रंगों की जिसमें काले रंग के लिए जामुन काला अंगूर अंगूर रसभरी मुनक्का आलूबुखारा आदि में पाए जाते हैं । जो शरीर को लाभ देने का कार्य करते हैं। फल…