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‌क्या लक्ष्य से भटक रहे हैं भारतीय युवा....?


भारत के पांच सर्वश्रेष्ठ विश्विद्यालयों में  BHU का शुमार होता है। आजकल यूनिवर्सिटी उसमें पढ़ रही छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा में आ गया है।  महामना मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से सन् 1916 में स्थापित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय देश का जाना माना विशाल परिक्षेत्र में फैला शिक्षा का केंद्र है। भारत सहित कई देशों के करीब 30 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। कभी शिक्षा के लिए जाना जाने वाला ये यूनिवर्सिटी आज छात्राओं की असुरक्षा के लिए जाना जाता है। विगत 21 सितम्बर को एक छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ से आहत छात्राओं ने इसकी शिकायत यूनिवर्सिटी के वॉइस चाँसलर से किया लेकिन कोई कार्यवाही न होता देख रात में ही धरना देना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया ,जिससे मौजूद दर्जनों  छात्राएं घायल हो गई। अब फिर क्या था सत्ता दल व यूनिवर्सिटी का प्रशासन पर जुबानी हमले तेज हो गए । यहीं नही बेटी बचाओं ,बेटी बढ़ाओ की योजना पर सवाल 
 खड़े कर दिए गए। देश के युवाओं को किस दिशा में ले जाने का कार्य किया जा रहा है।आज अपने भविष्य को ही  बगावत का पाठ पढ़ाया जा रहा है। BHU जो कुछ हो रहा ये तो कुछ बात समझ में आ रहा है,लेकिन 09 फरवरी 2016 की शाम जेएनयू के परिसर में लगे पाकिस्तान जिंदाबाद, भारत तेरे टुकड़े होंगे इंसा अल्लाह,इंसा अल्लाह जैसे नारे लगना, कश्मीर में कालेजों के छात्र/छात्राओं  के हाथों कलम के बजाय पत्थर थमाना समझ से परे है। इन सभी घटनाओं से ये लगता है की राष्ट्र विरोधी ताकतें युवाओं को दिग्गभ्रमित करने का कार्य कर रहीं।  बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय  की घटना पर गौर करें तो ये घटना छेड़छाड़ की अन्य घटना से परे नही हैं । लेकिन इसका  बहुत गहरा संदेश जोकि देश ही नही वरन् विश्व पटल पर जायेगा। बनारस का राजनीतिक नाता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा होने से विश्व मीडिया की नजरें हमेशा गड़ी रहती है। जिस प्रकार लड़कियों के साथ अभद्रता और फिर लाठीचार्ज हुआ । ये दुःखद घटना थी,ऐसा नही होना चाहिए।  इसका जिम्मेदार कहीं न कहीं विश्व विद्यालय का प्रशासन भी है , जो कि घटना के 52 घण्टे बाद भी धरने पर बैठी लड़कियों से वार्ता तक नहीं किया ।  और पुलिसिया कार्यवाही की गई।  यही कारण बन गया और मामला राजनीतिक रंग देने लगा। कांग्रेस सहित बिभिन्न पार्टियों ने इस मसले को और अधिक तूल शुरू कर दिया। हाँ योगी सरकार जरूर कार्यवाई दोषियों पर किया ,लेकिन देर हो गई और बेटियों पर लाठीचार्ज का मसला मीडिया में गूंजने लगा है। मोदी भी इस कार्यवाही से योगी सरकार से नाराजगी जता चुके हैं। लेकिन विपक्ष को मोदी के क्षेत्र हुई घटना को देश विदेश में भुनाने में जुट गए हैं। उन्हें इससे मतलब नही है कि देश विदेश में भारत की  छवि पर क्या असर पड़ेगा! फिलहाल जिस प्रकार युवाओं को राजनीतिक मोहरे के रूप में प्रयोग किया जा रहा है ,बेहद दुःखद बात है। रही बात बीएचयू के वॉइस चांसलर की जो अपने को बादशाह समझता है वो सिर्फ जनता का सेवक है।  विश्वविद्यालय की किसी समस्या का निस्तारण करना वीसी का फर्ज बनता है। वीसी के रवैया ने यूनिवर्सिटी की गरिमा को गिराने कार्य किया। जिस तरह देश के युवाओं का उपयोग राजनीतिक दल एवं आसामाजिक तत्व कर रहे हैं,ये देश के लिए चिंता का विषय है। हमें इसके प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। युवाओं को अगर इसी तरह बरगलाने का कार्य होता है ,तो वो दिन दूर नहीं जब जेनयू में लगे नारे अपनी सार्थकता साबित करने लगेंगे। जेनयू में प्रोफेसर रहे और राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेश पंत का कहना है कि हमें अभिव्यक्ति की आजादी जरूर मिले ,लेकिन देश को नुकसान पंहुचाकर नही।  पंत जी बात से  पूर्णतया सहमत हूँ कि अभिव्यक्ति की आजादी के साथ साथ देश की अखण्डता भी कायम रहने जरूरत है। इसके लिए देश के युवाओं की सहभागिता अति आवश्यक है। यही राष्ट्र के निर्माण कर्ता हैं। इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय युवा नीति 2014 जारी किया हो भी क्यों न देश की 65 फीसदी आबादी में 35 वर्ष की उम्र से कम की आबादी है। यानी कि हमारा देश युवा है,ये युवाओं का देश है।जिनमें राष्ट्रवाद कूट कूट भरा है जोकि किसी के कहने से नही आयेगा। चंद  भ्रमित युवाओ द्वारा देश की छवि बिगाड़ने  से नही बिगड़ने वाली नही है। हमारे युवा छात्र/छात्राओं को अपने भविष्य के साथ राष्ट्र के भविष्य को भी देंखे। अंत में अख्तर नब्जी का एक शेर अपनी बात समाप्त करता हूँ
कागज की नाव छोड़ दी मैंने ,
अब समुंदर की जिम्मेदारी है।।
‌@NEERAJ SINGH

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