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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष--------आजादी के सपूत बाबू गुरूप्रसाद सिंह


आज हम देश की आजादी के 70वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। जाने कितने राष्ट्र प्रेमियों ने अपनी जान न्यौछावर कर दिया और बहुत सारे माँ के सपूत जीवन का बहुमूल्य समय देश को दिया तभी जाकर भारत माँ गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुई थी। उन्हीं में से एक सेनानी अमेठी के विकास खण्ड जामों की दतनपुर धरती पर जन्म लिया था।गौरीगंज विधान सभा जोकि आजादी के बाद गौरा जामों  के नाम थी उसके प्रथम विधायक बाबू गुरुप्रसाद जी थे।जिन्होंने अपना जीवन देश की सेवा में लगा दिया। चाहे आजादी की लड़ाई में या आजादी के बाद स्वतन्त्रता सेनानियों के लिए हो,सारा जीवन ही देश सेवा के लिए अर्पित कर दिया था। 
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय  गुरु प्रसाद सिंह का जन्म 4 दिसंबर सन 19२० को दतनपुर रिछौरा पोस्ट कटारी ब्लाक जामो में हुआ


 था 20 वर्ष की अवस्था में सन् 1940 में कांग्रेस में शामिल होकर भारत छोड़ो आंदोलन के सिलसिले में 15 अगस्त 1942 को पकड़े गए जिला जेल सुल्तानपुर में 12 /11/1942 तक तथा 12/11/1942 से 30/11/1943 तक सेंट्रल जेल नैनी में नजरबंद रहे अंग्रेजों से उन्होंने अनेक यातनाएं सही,सन् 1948 तक कांग्रेस कमेटी के प्रधानमंत्री चुने गए और भूम धरी आंदोलन के जिला संचालक भी रहे सन् 1948 मे  जिला परिषद सुल्तानपुर के सदस्य चुने गए सन् 1952 से सन् 1962 विधानसभा सदस्य रहे इन्होने अपने विधानसभा क्षेत्र में कई शिक्षण संस्थाओं का भी निर्माण करवाया जिन्होंने अपना जीवन बहुत ही साधारण व्यतीत किया इनका स्वर्गवास 17 फरवरी सन् 2012 को हो गया   ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को देश शत शत नमन करता है। इनके परपौत्र राजेश सिंह जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित संगठन अमेठी के जिलाध्यक्ष के पद पर रहते हुए स्वतन्त्रता सेनानी आश्रितों के सहायता में तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि बाबू जी के पदचिन्हों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।
@नीरज सिंह

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