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पाक का नापाक चेहरा उजागर

जम्मू कश्मीर के उरी में सेना के कैम्प पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान का नापाक चेहरा पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गया है। वह पूरी अलग थलग पडता दिखायी पडा रहा है,यहां तक कि उसका सबसे करीबी मित्र देश चीन भी स्तब्ध है । उसने भी पाक का नाम लिए बगैर उरी घटना की निंदा की है, साथ आतंकवाद का विरोध करते हुए कहा है कि इसके खिलाफ कार्यवाही करनी होगी। कश्मीर की आड में आतंकवाद का खेल खेल रहा था इस बार नही होगा। पूरा विश्व जान गया है कि इसके पीछे पाकिस्तान का ही हाथ है। आज अमेरिका,चीन अफगानिस्तान,रूस,ब्रिटेन, फांस, कनाडा सहित व्श्वि कई देशों ने इस घटना की जमकर निंदा की है और अमेरिका ने तो पाकिस्तान को चेताया कि इस तरह की घटनाओं में उसका हाथ है। इसी का नतीजा है कि अमेरिकी संसद में पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने सबंधी प्रस्ताव रखा गया है जिस पर चर्चा जारी है। वहीं रूस ने पाक के साथ विमान सौदा भी रद्द कर दिया है। आतंकी देश घोषित के मसले पर संयुक्त राष्ट्र में चीन वीटो लगा देता था,आज वह विश्व अनेक देशों की प्रतिक्रिया से सहमत होकर उनके साथ खडा है। यहां तक कि पाकिस्तान के साथ आर्थिक प्रोजेक्ट पर भी मौजूदा समय पीछे हटने का मन बना रहा है। उरी घटना को लेकर देश में जहां आवाम में उबाल है और वे सडकों पर उतर कर पाकिस्तान के खिलाफ प्रर्दशन कर रहे हैं और सोशल साईटों पर अपनी भडास निकाल रहें हैं । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जबाबी कार्यवाही के लिए कह रहे हैं।ऐसा गुस्सा आवाम में पहले कभी देखने को नहीं मिला न ही इतनी बडी आतंकी घटना हुई थी। विश्व स्तर पर आतंकवाद का खिलाफत करने वाला भारत देश इसी साल करीब आधा दर्जन बडी आतंकी घटनायें झेल चुका है। अब भारत भी पूरे विश्व में पाकिस्तान के खिलाफ चैतरफा नाकेबंदी करना शुरू कर दिया , साथ हीउसे आतंकी राष्ट्र घोषित कराने का भी अभियान छेड चुका है। जहां भारत सरकार के प्रधानमंत्री,गृहमंत्री, रक्षामंत्री,विदेश मंत्री व सेना सहित बडे नेता व अधिकारी अपने तेवर कडे कर रखें है वहीं सेना की भी किसी भी परिस्थिति से मुकाबला करने के लिए तैयार हो गई है। ये बात भी सही है कि पाकिस्तान के नापाक चेहरे व इरादों को विश्व के सामने रखने व सबक सिखाने का वक्त आ चुका है,पर युद्ध ही किसी बात अन्तिम हल नही हो सकता है। वैसे बात सरकार आवाम की भावनाओं समझ रही है पर उनके हिसाब से पाकिस्तान से नही निपटा जा कता है क्योंकि देश के सामने अनेक परिस्थितियां होती हैं,बहुत सारी जिम्मेदारियां है। उसको ध्यान में ही रखकर सरकार कोई निर्णय लेगी।

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