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कश्मीरियत,इंसानियत,जम्हूरियत की नीति सुधारेगी कश्मीर के हालात......!

कश्मीरियत,इंसानियत,जम्हूरियत की नीति कश्मीर में हिंसा को रोक पाने में कितनी सफल होगी। ये तो आने वाले वक्त में पता चलेगा। कश्मीर के हालात के जिम्मेदार आज भी अशांति फैलाने में कोई कोर कसर नही छोड रहे हैं। 50 दिन से अधिक हो गये हैं लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। आज तक वहां कांग्रेस के अतिरिक्त क्षेत्रीय दलों की सरकारें रही हैं।स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को नरक में तब्दील करने की नापाक कोशिश पडोसी मुल्क पाकिस्तान दशकों से करता है आया। हमेशा कश्मीर मुद्दे का अंर्राष्ट्रीयकरण करने से बाज नही आता है। लेकिन जब इसे इसमें सफलता नही मिलती दिखी,तब इसने छदृम नीति अपनायी और अपने यहां आतंकियो ट्रेनिंग देकर हिंसा फैलाने के लिए कश्मीर की सीमा में घुसपैठ कराने लगा। और कश्मीर के अलगाववादियों के सुर में सुर मिलाने लगा। इसी कडी का नतीजा है कि आज अलगाववादियों के साथ मिलकर कश्मीर के युवाओं को भडकाने का काम किया जा रहा है। दो माह बीतने को है अभी कश्मीर के हालात सुधर नही रहे हैं। ये वाकये कोई नये नही हैं इससे पहले भी वहां के हालात बिगड चुके हैं लेकिन इस बार माहौल अलग है क्योंकि सेना पर जो पत्थर फेंके जा रहे हैं वो अपने हक के लिए नही बल्कि एक आतंकी के मारे जाने के बाद हिंसा फैलायी जा रही है। लेकिन इस बार कई बातं नई हुई हैं जैसे केन्द्र की मोदी सरकार व राज्य की महबूबा सरकार के साथ देश का विपक्ष भी एक मत है कि हिंसा फैलाने वालों पर सख्ती हो। केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री मोदी एवं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि दोषियों कत्तई बख्शा नही जायेगा। अलगाव वादियों से कोई बातचीत नही होगी। कश्मीर के विपक्षी नेताओं का रूख जरूर अफसोस जनक है । उन्हे हिंसा करने वाले छः हजार घायल लागों की चिन्ता है पर तीन हजार से अधिक घायल जवान इन्हे दिख नही रहे हैं। और हिंसा करने वालों से,पाक व अलगाववादी नेताओं से बात करने की वकालत कर रहे हैं जोकि शर्मसार करने वाली बात है। साधुवाद केन्द्र सरकार देना चाहिए जो सेना का मनोबल बढाने में कोई कोर कसर नही छोडी है। महबूबा मुफ्ती ने भी कहा है कि कश्मीर की आवाम षांति चाहती है हिंसा तो मात्र पांच प्रतिषत ही कर रहे हैं। कल प्रधानमंत्री से मिलने बाद जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा जिन बच्चों की मौत हुई है इससे हम दुःखी हैं। लेकिन सवाल करते हुए कहा क्या वे सभी सेना के पास विस्किट व टाफी खरीदने गये थे! बेशक पत्थरबाजी में शामिल थे। अब सवाल ये उठता है कि जिन हाथों में कलम कापी होनी चाहिए उन हाथों में पत्थर किसने थमाया। इसकी भी एक कहानी एनआईए की जांच में सामने आयी है। बिगत कुछ माह में पाकिस्तान व सऊदी अरब से कश्मीर की बैंकों में करोडों की फंिडंग हुई है और जिनके पास खाने के न थे उनके खातों करोडों रूपये का लेन देन हुआ है। जांच में पता चला है कि इन्ही पैसों से कश्मीर हिंसा फैलाने का काम अलगाववादी नेताओं की देख रेख में चल रहा है। युवाओं व बच्चों को हजारों रूपया थमाकर उन्हें सेना पर पत्थर मारने व ग्रेनेड फेंकने लिए उसकाया जा रहा है। केन्द्र सरकार की अटल जी की कश्मीरियत,इंसानियत,जम्हूरियत की नीति व आवाम के प्रति सकारत्मक रवैया एवं आतंकियो की तरफ कडा रूख अवश्य ही दूरगामी परिणाम देगें जोकि कश्मीर की समस्या का बडा हल साबित हो सकता है। फिलहाल इस कृत्य से पाक एवं अलगाववादी नेताओं की पोल खुल चुकी है। सच ही कहा है एक कश्मीरी शायर ने कि इश्क और हुस्न की तस्वीर बना फिरता है, यार तू भी बड़ा कश्मीर बना फिरता है।

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