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दिलचस्प बन रही अमेठी की सियासत.......................

दिलचस्प बन रही अमेठी की सियासत....................... अमेठी की राजनीति कितना करवट बदल रही है ये हाल के दिनों में राजनीतिक सरगर्मियां बता रही हैं। कैसे कांग्रेस के युवराज व पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भाजपा एक चक्रव्यूह में घेरने की कवायद में जुट गयी है। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की करीबी समझे जाने वाली स्मृति ईरानी को उतार कर जहां तगड़ी चुनौती दी थी। जब से लेकर अब तक स्मृति ईरानी बराबर अमेठी में आ रही हैं। और कोई ऐसा मौका नही छोड रही हैं कि जब कांग्रेस को घरने का काम न किया हो। इतना ही नही अब वहीं प्रधानमंत्री के बेहद करीबी समझे जाने वाले रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर को भी राहुल को अमेठी में घेरने के लिए मोदी की एनडीए सरकार ने लगा दिया है। उत्तर प्रदेश में राज्य सभा में गये रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी के ही संसदीय क्षेत्र के एक गांव को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद ले लिया है। जिसको लेकर कांग्रेस के पेशानी पर कुछ ज्यादा ही बल पड़ गया है। अभी तक तो कांगे्रस स्मृति ईरानी के आने को लेकर ही हलाकान रहती थी। कल ही कांग्रेस ने रविवार को अमेठी आ रही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को लेकर जिलाध्यक्ष योगेन्द्र मिश्र द्वारा आहूत प्रेस वार्ता कर तीखा हमला बोला था और कहा था कि वह पौधरोपण करने नही बल्कि राजनैतिक पौधरोपण करने आ रही है। वह अमेठी सिर्फ झलक दिखलाने का काम कर रही हैं। रक्षामंत्री ने गौरीगंज विधान सभा क्षेत्र के बरौलिया गांव के प्रधानमंत्री आर्दश ग्राम योजना के तहत गोद लिया है। राहुल गांधी ने सलोन विधान सभा के जगदीशपुर ग्राम सभा को गोद लिया था। रक्षामंत्री जिस गांव को गोद लिया है उस गांव में लोक सभा चुनाव के ठीक बाद आग लगने की घटना घटी थी। जिसमें 65 घर जलकर खाक हो गये थे। लोक सभा चुनाव के बाद कांग्रेस का कहना कि बाहरी प्रत्याशी अब नही लौटेंगी, अक्सर हुआ भी है।लेकिन इस अग्निकांड पर संसद कार्यवाही से निकलते ही स्मृति ईरानी ने संसद भवन में मीडिया से मुखातिब होकर अग्निकांड पर गहरा दुःख व्यक्त किया। और यहीं से राहुल व ईरानी के बीच जो भी वार-प्रतिवार हुआ था उसके बाद अग्निकांड के इसी घटना को लेकर राहुल व ईरानी आमने-सामने हुई थी। ईरानी ने सबसे पहले पिछडी जाति बाहुल्य वाले इस गांव में अहेतुक सहायता पहुंचवायी थी उसके बाद राहुल गांधी भी न केवल मदद पहुंचवाये थे बल्कि खुद भी अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ गांव गये थे। उनके बाद ईरानी जब अमेठी आयी तो उन्होनंे अपना पहला कार्यक्रम इसी गांव में रखा था। और अब जहां से राहुल व स्मृति के बीच मदद करने के होड को लेकर शुरूआत हुई थी उसी गांव को रक्षामंत्री ने गोद ले लिया है। अब यह भी माना जा सकता है कि पूरे देश में गांधी परिवार के गढ़ अमेठी के दो आदर्श गांव के बीच तुलना भी होगी। इनमें अब देखना है कि यह सब दोनों राजनीतिक धुरंधरों जनता को दिखाने के दांव पेंच हैं या फिर इस रार से अमेठी को कोई नई दिशा मिलेगी, वक्त के गर्भ में है।

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