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लोकतांत्रिक विचारधारा का हास !

लोकतांत्रिक विचारधारा का हास ! स्ंासद की कार्यवाही शायद सांसदों के लिए राजनीति का अखाडा मात्र रह गया है। उसकी अहमियत क्या है, देश की प्रगति विकास के लिए कितनी अहम है, जनता के नजर में क्या मायने रखती है! इन सवालों का जबाब देने की आवश्यकता नही है। जनप्रतिनिधियों को इससे कोई लेना देना नही रह गया है। हां रह गया ये जरूर है कि देश हित के कार्य न होकर व्यक्तिगत अरोपों प्रत्यारोपों का केन्द्र बन रह गया है विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र का संसद भवन। सैकडों साल के राजनीतिक अनुभव वाली कांग्रेस हो या जनसंघ वाली भाजपा या फिर समाजवादी और वामपंथी विचाराधारा वाले दल सभी अपने गौरवमयी इतिहास को भुलाकर सिर्फ कौवा पंचायत बन के रह गयी है हमारे देश का सबसे बडा अंग जहां से देश की दिशा व दशा तय होती है। देश में स्वास्थ्य,शिक्षा, गरीबी उन्मूलन, सुरक्षा, रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों को छोड हमारे सांसद एक दूसरे को नीचा दिखाने का कार्य किया जा रहा है। आखिर जनता पूंछती है क्या हम इसी लिए अपना अमूल्य वोट देकर भेजा है कि सुषमा स्वराज क्यों ललित मोदी की मदद की जैसे बिना सिर पैर के मुद्दों पर बहस हो कि हमारी समस्याओं के निराकरण के लिए चुना है, ये अहम सवाल बन रहा है। देश की राजनीतिक दिशा किस ओर जा रही है ये सोचनीय विषय बन चुका है । हाल के दिनों में कुछ ऐसी बाते हो रही हैं जोकि देशहित में नही है । न ही इन बहस से देश का भला होने वाला है। सैकडों मौतों का गुनहगार याकूब मेमन को फांसी देने को लेकर तथाकथित सेकुलर लाबी व अपने को साफ सुधरा बताने वाले तथाकथित बिकाऊ चैनलों वाले देश की सबसे बडी अदालत व देश के सर्बोच्च नागरिक महामहिम राष्ट्रपति तक को कठघरे में नही चूके। फांसी के अंतिम समय तक दोषी को बचाने की मुहिम चलाकर विश्वपटल पर एक नया आयाम स्थापित किया गया। सुषमा ने ललित मोदी को बीमार पत्नी का इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति पर संसद ठप्प हो गई है।क्योंकि बहुत बडा गुनाह हुआ है। वही आतंकियों के साथ सहानुभूति दर्शाने वाले देश के सच्चे राष्ट्र भक्त साबित करने में जुटे हैं। उधर मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाले ने नया रिकार्ड सीरियल मर्डर होनें से भर्ती व्यवस्था से लेकर साफ सुधरी छवि के माने जाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज चैहान को भी कठघरे में आ गये हैं। अब जरा देश की सबसे बडे राज्य पर गौर फरमायें जहां समाजवादियों की सरकार है। यहां तो हद तब हो गई जब हजारों करोड के घोटाले में फंसे नौकर शाह यादव सिंह की जांच सीबीआई से कराने पर रोक लगाने के लिए सपा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये और न्यायिक समिति से कराने की मांग की। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने से इनकार करते हुए सरकार को फटकार लगायी कि आपको खुश होना चाहिए कि इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सरकार ओर से केस लड रहे वरिष्ठ वकील व कांग्रेसी दिग्गज कपिल सिब्बल संयोग से व्यापम केस के भी वकील हैं, उनसे माननीय कोर्ट ने चुटकी लेते हुए कहा कि आपको व्यापम केस में सीबीआई पर भरोसा था लेकिन इस मामले पर आप सीबीआई पर भरोसा नही है जता रहे हैं। ये हालत है कि इससे शर्मनाक बात क्या हो सकती है कि ऐसी क्या मजबूरी है कि एक घोटालेबाज को बचाने के लिए प्रदेश की सरकार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड रहा है।

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