Skip to main content

क्या होगा इस पतित पावन धरती का------------------!

सूचना क्रान्ति के दौर में भी भंयकर पिछड़ा है अमेठी जनकवि और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने अमेठी जैसे वीवीआईपी लोकसभा क्षेत्र में भी 2 जी और 3जी जैसी सेवायें न चलने पर रोष जताते हुए कहा है कि देश 21 वीं शताब्दी में पहुंच गया है और अमेठी के लोगों को 16 वीं शताब्दी में रहने के लिए विवश होना पड़ रहा है। सूचना क्रान्ति के जबरदस्त बदलाव के बाद भी अमेठी के लोगों को टेक्नोलॉजी से जानबूझ कर वंक्षित रखा गया है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ कुमार विश्वास ने कहा कि अमेठी का नाम एक बड़े परिवार से जुड़ने के कारण दुनिया भर में लिया जाता है। लेकिन अमेठी को असल में देखने के बाद महसूस होता है कि जनता को केवल ठगा गया है। यहां केवल वंशवाद के नाम पर जनता को भ्रमित करके अपनी जगह तो संसद में तय की गयीए लेकिन अमेठी लोकसभा क्षेत्र के लोगों को सूचना क्रान्ति के युग में भी कोसों दूर रखा गया है। डॉ कुमार ने कहा ये सब इसलिए किया गया है कि अमेठी के लोग अगर सूचना क्रान्ति के साधनों जैसे टीवीए इंटरनेटए टिव्टरए फेसबुक जैसे साधनों से अगर रुबरु हो जाऐंगे तो अपने जनप्रतिनिधि की हकीकत भी सामने आ जाएगी। डॉ विश्वास का कहना है कि मूलभूत सुविधाऐं देने के साथ जनप्रतिनिधि का ये भी दायित्व बनाता है कि उस इलाके की जनता के सामाजिक और मानसिक विकास के लिए दूरसंचार के माध्यमों से लगातार जोड़ा जाए जिसके कि आम जनता ये जान सके कि आपके क्षेत्र और दुनिया में किस तरह के राजनीतिए सामाजिकए आर्थिक परिवर्तन लगातार हो रहे हैं।
डॉ कुमार ने आज दिन में आम आदमी पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए सैकड़ों नेता और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की। इस दौरान डॉ कुमार ने लक्ष्य दिया कि अमेठी लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले हर एक ग्राम तक कार्यकर्ता को पहुंचना है। उन्होंने लक्ष्य देते हुए कहा कि ये सुनिश्चित किया जाय कि आप के कार्यकर्ता ने हर उस आम शख्स तक सूचना दे दी है कि पार्टी आने वाले समय में अमेठी के विकास के लिए क्या करने जा रही है। साथ ही अगर आम आदमी पार्टी का साथ देता है तो वो अमेठी के हर बदलाव को जल्द ही अपने सामने देख सकेगा।
डॉ कुमार ने आज इलाहाबाद और बनारस से आये सैकड़ों लोगों से अमेटी स्थित आम आदमी पार्टी के दफ्तर पर मुलाकात की। 1977 के देशव्यापी आंदोलन और राजमोहन गांधी के साथ जुड़े लोगों ने डॉ कुमार से मुलाकात करके बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर गहन विचार किया। साथ ही आश्वासन दिया कि पूरे उण्प्रण् से लोग आकर अमेठी की आम जनता के साथ जनजागरण करेंगे और लोगों को बतायेंगे कि कैसे उण् प्रण् में बदलाव अमेठी से निकलकर हो सकता है।
ये बातें लोकसभा चुनाव के समय जनता को बदलाव  श्के सपने दिखा रहे थे डा0 कुमार श्विास, जोकि देश के अच्छे कवि के रूप में जाने जाते हैं। लेकिन चुनाव के बाद दोबारा  क्षेत्र में झांकना मुनासिब नही समझे।कहां अमेठी में ही रूक कर जिन्दगी बिताने की करते थकते नही थे।तभी तो इनके इरादे पहले ही जनता ने भांपकर धूल फंका दी।  कैसे करें इन नेताओं के बातों का शिवास क्योकिं जब शिवास से विश्वास ही उठ चला है। जब ऐसे ही कर्णधार देश को मिलेंगे तो क्या होगा इस पतित पावन धरती का।

Comments

Popular posts from this blog

भारत की राजनीति में प्रियंका गांधी !

भारतीय राजनीति में कांग्रेस की तरफ से एक और गांधी की एंट्री हुई है ,नाम है प्रियंका गांधी । कभी रिश्तो की डोर लेकर अमेठी की राजनीति में सरगर्मी मचाने वाली कभी मां के चुनाव की कमान संभालती तो कभी भाई राहुल गांधी के चुनाव की कमान संभालने का कार्य प्रियंका गांधी करती थी । प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से उनका नाता राजनीति से जुड़ा रहा है और अक्सर कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में आने के लिए दबाव बनाया जाता रहा है या फिर मीडिया कि लोग जब पूछते कि आप कब आ रही हैं सक्रिय राजनीति में तब जबाब में बस मुस्कुरा कर आगे निकल जाती थी । आज वही प्रियंका गांधी भाई के साथ कदम से कदम मिलाने की सोच लेकर भारतीय राजनीति में आ चुकी हैं । ऐसा नहीं है कि राजनीति में पहली बार आई हैं, मां और भाई के चुनाव को बखूबी संभालती थी इतना ही नहीं उनकी सीटों के अलावा आसपास के जिलों की सीटों में प्रचार भी किया था।  अब तक कितना डंका इनका बज चुका है यह तो पिछले इतिहास को देख कर ही पता चलता है ।लेकिन एक बात तय है कांग्रेस जिस हाल में आज खड़ी है प्रियंका गांधी कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी…

जवानों की शहादत से घायल कश्मीर

किसी शायर ने कश्मीर की समस्या पर शायराना अंदाज में कहा.... ये मसला दिल का है , हल कर दे इसे मौला। ये दर्द-ए- मोहब्बत भी, कहीं कश्मीर ना बन जाए।। कवि ने इन कविता की लाइनों में कश्मीर के दर्द को बयां किया है कि कश्मीर का मसला ना सुलझने वाला मसला बनकर रह गया है। देश का कभी सिरमौर कहा जाने वाले कश्मीर को आतंक रूपी एक नासूर रोग लग चुका है। देश आजाद होने के बाद कश्मीर का दो भाग हुआ। जिसमें पाकिस्तान वाले हिस्से को पीओके कहा गया यानी कि पाक अधिकृत कश्मीर , वहीं भारतीय हिस्से को कश्मीर कहा गया गया। सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों का भारत में मिलाया । केवल यही एक इकलौता राज्य रहा जिसे 35 ए, 370 धारा के तहत विशेष दर्जा के साथ भारत मे शामिल किया गया । एक अलग संवैधानिक अधिकार दिया गया । लेकिन यही विशेष अधिकारों का प्रतिफल रहा कि कश्मीर का एक तबका धीरे-धीरे इसे अपना सर्वोच्च अधिकार मानने लगा और इसी का परिणाम हुआ कश्मीर में एक अलग गुट उभर कर आया। जिसे अलगाववादी गुट कहा जाता है । अगर इस गुट को को पाक परस्त गुट कहा जाए तो अशियोक्ति नहीं होगी। देश व प्रदेश की सरकारों की नीतियों पर भी कश्मी…

सावधान! होली का रंग, ना हो जाए बदरंग

मौज मस्ती का त्यौहार होली को लेकर बच्चे या युवा या फिर हो बूढ़े सब पर एक ही रंग चढ़ा रंग चढ़ा होता है वह है मस्ती इस त्यौहार को लेकर लोगों में विशेषकर युवाओं बच्चों में उमंग व में उमंग व उत्साह देखते ही बनता है। होली के दिन रंगोली की तरह रंगा हुआ होता है। लेकिन जिन रंगों का हम प्रयोग प्रयोग करते हैं । उसको लेकर क्या हम सोचते हैं कि यह रंग हमारे शरीर को कितना नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। नहीं इसका अनुमान लोगों को कम ही रहता है। इसलिए इन रासायनिक रंगों से बचने की आवश्यकता है। क्योंकि यह जितना ही हानिकारक होता है , उतना ही प्राकृतिक रंग हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। इसलिए रासायनिक रंगों के प्रति सावधानी बरतना अति आवश्यक है । जहां एक तरफ फलों सब्जियों व फलों के रंग सेहत के के लिए लाभकारी होते हैं । वहीं रासायनिक रंग सेहत के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं । क्या हैं प्राकृतिक रंगों से स्वास्थ्य के लिए लाभ अब हम बात करते हैं प्राकृतिक रंगों की जिसमें काले रंग के लिए जामुन काला अंगूर अंगूर रसभरी मुनक्का आलूबुखारा आदि में पाए जाते हैं । जो शरीर को लाभ देने का कार्य करते हैं। फल…