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कहीं आप में भी तो नहीं.....!

विजयदशमी पर विशेष---- 




आप सोच रहे होंगे ये कैसा सवाल कर दिया जिसका मतलब समझ में नहीं आ रहा है। जी हां बिलकुल सोचा आपने हम तो आपके भीतर बैठे बुराईयों के दानव की बात कर रहे हैं, जो दिखता नही है, कभी-कभी उसे आप समझ नही पाते हैं कि ये अवगुण है या फिर गुण। जब आप इसके बारे में थोडा बहुत समझते हैं तो उसे छिपाने का प्रयास करते हैं और खुद से भी झूठ बालना शुरू करते हैं, जो एक और बुराई उन्हीो बुराईयों के साथ समाहित हो जाती है। जीवन दर्शन समान है । जीवन कोरे कागज के समान है जिसमें जैसा रंग भरोगे वैसा ही दिखेगा। जीवन के कोरे कागज में बुराई भरोगे तो वही भरेगा , अगर गुण व संस्कागर भरोगे तो वही दिखेगा । अगर हम जीवन का मन से विश्लेषण करते हैं ,तो जीवन में घटी अच्छी -बुरी घटनाओं के साथ-साथ आपके अंदर की अच्छाई व कमियों के दर्शन प्राप्त हो जाएंगे। अच्छे इंसान बनने के लिये अच्छी प्रवृत्तियों को अपने जीवन मे लाना होगा। वही कभी-कभी चन्द स्वार्थ व लाभ के लिए आसुरी प्रवृत्तियों को अपना लेता है। और खुशहाल जीवन की राह से भटक जाता है। इसी प्रकार प्रवृत्तियों से बचने के लिए हमारी भारतीय संस्कृति में ढ़ेर सारी बात…
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बापू के सपनों का भारत बना सियासी अखाडा

देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 150वीं जयन्ती धूमधाम से मनाई जा रही है। देश के हर कोने में राष्ट्र बापू को याद किया गया। ऐसे ही नही आज बापू को राष्ट्रपिता का दर्जा मिला है। उनके सत्य,अहिंसा,ईमानदारी व आदर्शों की देश ही नही दुनिया कायल थी। देश की आजादी दिलाने में उनके कर्तव्यों को न भुलाने के और जनता को पुत्र समान प्यार देने के वाले बापू को राष्ट्र पिता का दर्जा मिला । हर वर्ष 02 अक्टूबर पर उनकी जयंती सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में धूमधाम से मनाई जाती है। इस वर्ष 02 अक्टूबर की विशेषता 150वीं वर्षगांठ होना था। जिसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता वर्ष के रूप में मना कर बापू को श्रद्धांजलि दी।प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार 60 करोड़ की आबादी तक शौचालय की सुविधा दी गई। जिसे बापू के सपनों को साकार करने का कार्य किया गया है। आज के दिन देश दो महापुरुषों की जयंती मनाता है , पहला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दूसरे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर बहादुर शास्त्री का जन्मदिन 02 अक्टूबर को ही हुआ था। अब हम बात करते हैं इन महापुरुषों के सिद्धांतों व उनके मूल्यों पर चलने वाले देश में क…

भक्तों की मुरादें पूरी करती हैं माँ अहोरवा

द्वापर कालीन माँ अहोरवा देवी के मंदिर में भक्तों आस्था है कि सच्चे मन से मांगी गयी मुराद माँ अहोरवा अवश्य पूर्ण करती हैं शारदीय नवरात्रि तथा चैत्र नवरात्रि में भक्त माँ की विशेष पूजा अर्चना करतें हैं देवी माँ के नौ रूपों की पूजा करने वाले भक्त माँ अहोरवा के एक दिन में तीन रूपों के दर्शन कर अपने कल्याण की कामना करतें हैं| रायबरेली-इन्हौना मार्ग पर सिंहपुर ब्लाक मुख्यालय के निकट स्थित माँ अहोरवा देवी के मंदिर के बारे में कहा जाता है कि महाभारत काल में जब पांडव अज्ञातवास में थे तो माता कुंती समेत द्रोपदी व पांडवों ने देवी माँ की पूजा की थी प्राकृतिक रूप से विद्यमान माँ अहोरवा की मूर्ति के बारे में मान्यता है कि माँ के दर्शन से भक्तों के कष्ट तो दूर होतें ही हैं सच्चे मन से मांगी गयी मुराद भी माँ पूरी करती हैं|बड़ी संख्या में ऐसे भक्त हैं जो प्रत्येक सोमवार माँ के दर्शन कर परिक्रमा करतें हैं|मान्यता है कि दूध और पूत से परिवारों को संतृप्त रखने की शक्ति माँ अहोरवा में है| कई प्रकार के शारीरिक कष्टों वाले भक्त माँ के दर्शनों से निजात पाते हैं बड़ी संख्या में ऐसें भक्त…

लोगों की मन्नतों को फलीभूत करता रहा है सिद्धपीठ टीकरमाफी आश्रम

भारत देश में यूपी के अमेठी जनपद में मौजूद सिद्धपीठ स्वामी परमहंस आश्रम टीकरमाफी में भक्तों द्वारा सिद्धपीठ पर मंथा टेका और पूजा अर्चना कर अपनी मनौती को पूरा करने के लिए स्वामी जी की आराधना करते हैं।न जाने कितने के दुख दूर हुए और कितने परिवारों में कलह से शांति मिली। और नव वधूओं की गोद हरीभरी हुई। कितने अपने रोजगार और पढाई के लिए मन्नते मांगी। पीठ के महंत दिनेशानंद महाराज लोगों को स्वामी जी की भभूती और प्रसाद वितरित किया। और स्वामी जी की नीरि घर-घर शांति का संदेश देने परिवार के बीच पहुची। जो एक बार आया वह बिना दुबारा प्रसाद ग्रहण किये बेचैन हो जाता है। जिनकी मत मार जाती है जो पागल हो जाते है वो भी गोसेवा और समाधि के दर्शन सुबह शाम आरती प्रसाद ग्रहण करने से उनमें बदलाव सा आ जाता है। देश के कोने कोने के अतिरिक्‍त सुलतानपुर, प्रतापगढ, चिलबिला, आदि स्‍थानों के व्यापारी भी समाधि पर पूजा अर्चना कर स्वामी जी से सुख शांति की मंगल कामना करते हैं। यहां पर विशाल गौशाला है जो विशाल जंगल में अपना चारा स्वयं तलाशती है। जबकि आश्रम के आस-पास के किसान भूषा और अनाज दोनों का दान कर आश्रम में श्रद्धा के…

इतिहास के पन्नों में दफ्न थी दो भाइयों की अमर कहानी

गुलामी की जंजीर से जकड़े भारत को दासता से मुक्ति दिलाने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपना सर्वस्व लुटाया। ब्रिटिश शासन काल में भारतीय जनमानस पर हो रहे क्रूर अत्याचार के खिलाफ छिड़ी जंग में क्षेत्र के अनेकों ऐसे वीर योद्धा शामिल रहे जिनकी दास्तान इतिहास के पन्नों में भी जगह नही बना पाए।जिसके पीछे मुख्य कारण ये स्वयं अपने परिजनों से बिछुड़ गए तो समाज क्या परिवार भी इनके हाल व अंजाम से अंजान ही हो गया । इन देश भक्त स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के परिवार की भी हालात और दशा इतनी खराब हो गयी कि समाज की मुख्य धारा से किनारे हो गए । मुसाफिरखाना क्षेत्र के नेवादा गॉव के ऐसे दो जांबाज देशभक्त भाई थे ।लल्लू सिंह व संकठा सिंह।इन दो सगे भाइयों में बड़े भाई लल्लू सिंह को देश के लिए शहीद होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जबकि छोटे भाई संकठा सिंह नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज की ओर से स्वाधीनता आंदोलन की जंग लड़ते हुए ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए थे।नेवादा गॉव के निवासी ये देशभक्त सगे भाई स्वनाम धन्य पिता महादेव सिंह के पुत्र थे । साधारण ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े दो…

सावधान! होली का रंग, ना हो जाए बदरंग

मौज मस्ती का त्यौहार होली को लेकर बच्चे या युवा या फिर हो बूढ़े सब पर एक ही रंग चढ़ा रंग चढ़ा होता है वह है मस्ती इस त्यौहार को लेकर लोगों में विशेषकर युवाओं बच्चों में उमंग व में उमंग व उत्साह देखते ही बनता है। होली के दिन रंगोली की तरह रंगा हुआ होता है। लेकिन जिन रंगों का हम प्रयोग प्रयोग करते हैं । उसको लेकर क्या हम सोचते हैं कि यह रंग हमारे शरीर को कितना नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। नहीं इसका अनुमान लोगों को कम ही रहता है। इसलिए इन रासायनिक रंगों से बचने की आवश्यकता है। क्योंकि यह जितना ही हानिकारक होता है , उतना ही प्राकृतिक रंग हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। इसलिए रासायनिक रंगों के प्रति सावधानी बरतना अति आवश्यक है । जहां एक तरफ फलों सब्जियों व फलों के रंग सेहत के के लिए लाभकारी होते हैं । वहीं रासायनिक रंग सेहत के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं । क्या हैं प्राकृतिक रंगों से स्वास्थ्य के लिए लाभ अब हम बात करते हैं प्राकृतिक रंगों की जिसमें काले रंग के लिए जामुन काला अंगूर अंगूर रसभरी मुनक्का आलूबुखारा आदि में पाए जाते हैं । जो शरीर को लाभ देने का कार्य करते हैं। फल…