Skip to main content

राजनीति के मंच पर छन रहे सियासी पकौड़े


‌आजकल देश में समस्याओं को दरकिनार कर राजनीतिक दल पकौड़े के पीछे  चुके हैं। सोशल साइट पर इसे लेकर कोहराम मचा है,कि मोदी जी ने ये कह डाला देश का युवा बेरोजगार पकौड़ा बेचे, घोर अपमान । इतना ही नही विभिन्न दल के नेता पकौड़ा तलते नजर आ रहे हैं। अब बात करें कि ये बात किधर से आई!  विगत 19 जनवरी को देश के एक बड़े चैनल में इंटरव्यू के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बहुत से बेरोजगार लोगों को बैंक से ऋण दिया गया है , जिससे वे अपना छोटा मोटा व्यवसाय खोल सकें। उदाहरण के रूप में चाय व पकौड़े की दुकान खोलने की बात कही, जिससे अपना जीवन यापन कर सके। फिर क्या था विपक्षी राजनीतिक दलों के भी पकौड़े  छनने लगे। इसे तो मुद्दा ही बना दिया गया और युवाओं से जोड़ दिया । कांग्रेस हो या फिर समाजवादी पार्टी के नेता आजकल सड़कों पर उतर कर पकौड़ा तलने  में जुट गए हैं । इनका मानना है कि देश के बेरोजगारों को पकौड़े बनाने की सलाह देकर उनका मोदी जी ने अपमान किया है। ये तो हुई राजनीति की बातें । मोदी जी के बयान के मायने चाहे जितने लगाये जा रहे हों,लेकिन ये भी एक सच्चाई है कि आज भी देश में लाखों की संख्या में परिवार के लोग अपना जीवन यापन इसी पकौड़े को बना के कर रहे हैं। यही उनका रोजगार भी है। पकौड़े लोगों के रोजगार का साधन है।  इसे राजनीति के दोने में वोट की चटनी के साथ इस्तेमाल करना कहाँ तक उचित है। ये भी सच है कि देश में पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार के अवसर कम हैं, नौकरियां भी न के बराबर हैं।  सरकार का दायित्व बनता है कि इस बेरोजगारी के दौर में बेरोजगार युवाओं को रोजगार व नौकरी उपलब्ध कराये। मोदी के बयान को तोड़मरोड़ कर न पेश किया जाना चाहिये क्योंकि उनके सलाह में दम भी है।  आय के लिहाज से निचले तबके लोग स्वरोजगार के लिए उनको पैसे की आवश्यकता होती है। और छोटे मोटे रोजगार कर सके। ऐसे बिजनेस में चाय,पकौड़े का भी व्यवसाय शामिल है। कांग्रेस ,समाजवादी जैसी पार्टियों के नेताओं को समझना यही हकीकत है। इसे मान कर सड़क पर पकौड़ा छानना बंद करें। मोहनजोदड़ों काल से लेकर अबतक पकौड़ा काफी हाईटेक हो चुका अब पॉलिटिक्स का हिस्सा बन गया। आज पकौड़े की टीआरपी का स्वर्णिम समय चल रहा है। मोदी की पकौडी पॉलिटिक्स में आज सभी दल उलझ कर रहे गए हैं। उनसे मोदी पकौड़े तलवा रहे हैं। विपक्षियों के नेताओं को पता नही कि मोदी पहले चायवाले को अपना बनाया और अब पकौड़े वाले से अपना नाता जोड़ने का नया पांसा फेंका है।अब देखना है कि इसे भुनाने में कितना कामयाब होते हैं। फिलहाल अभी सियासत में सियासी पकौड़े टेल जा रहे हैं।
@NEERAJ SINGH

Comments

Popular posts from this blog

प्रिय पाठकों होली की शुभकामनाएं.....

दुश्मनों पर रहम का अनर्गल प्रलाप क्यों .....!

कश्मीर को आतंकी पंजे से मुक्त करने में लगे सेना के जवानों की मुहिम रंग लाने लगी है। कश्मीर की जम्हूरियत को शांति का सकून दिलाने की ओर अग्रसर भारतीय फौज के जवानों के मनोबल तोड़ने की साजिश के तहत प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का बयान आया है। उनका कहना है कि जिस प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी रमजान के मौके पर सीजफायर का ऐलान किया था उसी तर्ज पर इस बार भी रमजान के मौके पर आतंकियों के खिलाफ चल रहे मुहिम को रोक दिया जाना चाहिए। ये बयान कहाँ तक उचित है कि जो गलती पिछली सरकारों की हैं, उसी गलती को पुनः दोहराना कितना सही है,बजाय सबक लेने के! जब बाजपेयी सरकार ने सीजफायर करने का ऐलान किया था ,ठीक उसी दरम्यां जमकर सीजफायर का उलंघन आतंकी गतिविधियों में इजाफा भी हुआ था। एक बार फिर वही गलती दोहराने के संबंध में महबूबा मुफ़्ती का बयान नाकाबिले तारीफ है। अब जब कि घाटी में सेना की आतंक़ियों के खिलाफ चल रही ताबड़तोड़ एनकॉउंटर की कार्यवाही दहशतगर्दी की कमर तोड़कर रख दिया है। घाटी में बुरहान वानी से लेकर अनेक कमांडर सेना व पुलिस की  कार्यवाही में मारे जा चुके हैं। लेकिन रमजान के पाक महीने से…