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मुझे भी पढ़ना है...........!


‌आँखों में विश्वास लिए हुए दोनों हाथ जोड़े हुए इशारे से  कहता है कि मुझे भी पढ़ना है। उसकी आस लिए आँखे देख मेरा मन द्रवित हो गया । मेरे मन के सागर में उसकी निवेदन भरा चेहरा तैरने लगा। मैं भी उसे मुस्कुराते हुए हामी भरते हुए सिर हिलाया और अपनी कार आगे बढ़ा दिया। ये देखा कि मेरी स्वीकृत भर से उसका चेहरा आत्मविश्वास से दमकने लगा। आप भी सोच रहे होंगे कि ये किसकी बात कर  रहे हैं । सही सोच रहें हैं हम बात कह रहे हैं एक सामान्य लड़के की नही बल्कि एक मूक बघिर की बात कर रहूँ ,वो एक सच घटना है जोकि मेरे साथ घटित हुई, जब हम स्वयं संचालित कॉलेज जा रहा था। ये बच्चा हमारे यहाँ कक्षा 08 से पढ़ता था। इसकी कॉलेज में इंट्री भी एक इतेफाक ही था। ये बच्चा मुस्लिम धर्म से belong करता था। इसके father जब इसके छोटे भाई व बहनों  का प्रवेश दिलाने आये और जब सभी का प्रवेश करा चुके तो मुझसे कहा कि सर एक परेशानी और है ,तब हमने कहा कि बताइये उसका निदान हो सके। तब उन्होंने जो बताया कि हम विश्वास नही कर पाये की इतने पिछड़े इलाकों में ऐसा भी है जोकि शिक्षा के क्षेत्र में अतिपिछड़ा है। उन्होंने बताया कि मेरे एक बेटा है जिसका नाम जान मोहम्मद है, जोकि मूक बघिर है। लेकिन पढ़ने का बहुत शौक है । वह प्राइमरी तक की शिक्षा ग्रहण भी कर चुका है। अब वो भी आगे पढ़ने की जिद कर रहा है और मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नही है । इसलिये पढ़ाने में असमर्थ हूँ ,अब मैं क्या करूँ। ये बात सुन मुझे जिज्ञासा जगी कि उससे कितनी जल्दी मिलूँ। मैंने उनसे कहा कि आप उस बच्चे को ले आइये तब बताऊंगा क्या करना है। दूसरे दिन उसे लेकर उसके पिता ले आये,मुझे भी उसका बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार था,आते उसने अपने मासूमियत भरे चेहरे पर मुस्कान विखेरते हुए नमस्ते किया,और चुपचाप खड़ा रहा। उसके पिता से मैंने पूछा कि क्या चाहते हो तब उन्होंने ने कहा मैं इसे पढ़ाने में असमर्थ हूँ। मैंने कहा ठीक आज इसका पढाई का जो भी खर्च होगा कॉलेज वहन करेगा,सिर्फ आप भेजते रहियेगा। जैसे ही बच्चे को पिता ने इशारे से बताया कि वो पढेगा। इतना समझते ही खुशी से उछल पड़ा।वो रोज टाइम पर कॉलेज आता और मन से पढ़ाई करता ,शरारत बिल्कुल नही करता था। इस वर्ष कक्षा 10 में पढ़ रहा था। लेकिन घर वाले नही आने दे रहे थे। उसके पिता आये तो समझाया तो घर जाकर उसे बताया कि सर बुलाया है। इसी वजह से सुबह सुबह कॉलेज के सामने खड़ा मेरा इंतजार कर रहा था। सामान्य बच्चे जहाँ पढ़ने के नाम पर भगते हैं ,वही ये मूक बघिर बच्चे में पढ़ने की कितनी तड़प है देखते बनती है। इस तरह के बच्चों को पढ़ाने और इनका सहयोग करने जो सुकून मिलता है ,शायद ही जीवन में दूसरा ऐसा अहसास मिले। काश यही सोच अगर हमारे समाज में आ जाये, निश्चित रूप से देश में अशिक्षा का अंधियारा मिटने में देर नही लगेगी। आइये हम सभी संकल्प ले कि इस मूक बघिर बच्चे से प्रेरणा लेते शिक्षा को बढ़ावा देने में कोई कोर कसर नही छोड़ेंगे ।  हर बच्चे ये कहे कि मुझे भी पढ़ना है******इस बच्चे के जज्बे को सलाम। 
‌@NEERAJ SINGH

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