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Showing posts from March, 2017

लोकतांत्रिक राह से भटक रही है हमारी राजनीति

नीरज सिंह उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का महापर्व विधानसभा चुनाव अब समापन की ओर है। करीब दो माह तक चले चुनाव में जनता जनार्दन ने खूब सोच समझ कर अपना मतदान कर दिया है। ये चुनाव मुद्दों को लेकर काफी चर्चा में रहा। विकास से लेकर नोटबंदी,रमजान से श्मशान तक मेड इन इंडिया से लेकर बाहुबली को कट्टप्पा ने क्यों मारा तक, रमजान से श्मसान तक,आजम की भैंस से लेकर मेंढक,हाथी, व गधा तक को खूब चर्चा में रहा। चुनाव ख़त्म होने तक विकास, बेरोजगारी, जैसे ज्वलंत गायब हो चुके थे। इस चुनाव में क्या खोया क्या पाया इसका जबाब न तो किसी नेता और न ही जनता के पास है। बेरोजगारों की फ़ौज और गरीबों के आशियाने खोज को इस चुनाव में किसी नेताओं नही दिखा। कहते हैं की जनता सब समझती है। देखना है कि अपने हितों का कितना ध्यान जनता रख पाती है ।सभी पार्टियों ने जोर आजमाइश में कोई कोर कसर नही रखा है। अब परिणाम के बाद ही पता चलेगा कि सोशल इंजीनियरिंग ,जाति, धर्म, क्षेत्रवाद व स्थानीय मुद्दे कितना चुनावों में हावी रहेंगे। धनबल भी चुनाव में इस्तेमाल किया गया ।फिलहाल इसमें कोई शक नही है कि सभी पार्टियां जनता के मूलभूत मुद्दों से भटक चु…