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आतंक के खिलाफ जरूरत है एक ठोस कार्यवाही की

भारत देश के उरी सेक्टर में 18 सितम्बर की भोर सुबह सेना के कैम्प पर हुए फिदायीन हमले में 17 जवानों की मौत का जिम्मेदार पाकिस्तान को सबक सिखाने का मौका आ गया है। ये सोच का विषय है कि आखिर पडोसी मुल्क की सरपरस्ती में आतंकवादियों की गतिविधियों के बढावा को हम कब तक सहेंगे ! देश की आवाम ये जानना चाहती है कि आतंकवाद के खात्मे के लिए देश की सरकार करने जा रही है या फिर ऐसे ही अपने मुल्क के जवानों की शहादत झेलते रहेंगे। इससे पूर्व में मणिपुर में सेना के 18 से 20 जवान शहीद हुए और पडोसी देश म्यांमार की सीमा में घुसकर 20 आतंकवादियों को सेना की कार्यवाही में ढेर कर दिया गया था। आज हमें ऐसी की जबाबी कार्यवाही की जरूरत है। देखने की बात है सरकार इसे लेकर कैसी कार्यवाही की जाती है। हालांकि प्रधानमंत्री ने देश की जनता को भरोसा दिलाया कि इस कायराना कार्यवाही का जबाब दिया जायेगा। मनोहर पार्रिकर और रक्षामंत्री व आर्मी चीफ जनरल सुहाग को मौके भेजा। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक करने के बाद कहा कि ये आतंकी घटना में पाकस्तिान के संलिप्तता से इंकार नही किया जा सकता है। चारों मारे गये फिदायीन पाकिस्तानी हैं। अमेरिका सहित अनेक देशों इस घटना की कडी निंदा की है। इतना ही नहीं कश्मीर में हो रही हिंसा में पाक के हाथ होने के पुख्ता सबूत एनआईए के पास हैं कि उपद्रवियों व अलगाववादियों को धन की फडिंग पाक ही कर रहा है। इन ठोस सुबूतों के आधार पर अब हमारे देश को चाहिए कि विश्व पटल पर पाकिस्तान की सच्चाई बताते हुए इस देश को आतंकी देश घोषित किया। और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ट्रेनिंग कैम्प बंद करवाने के लिए पाक पर दबाब बनाया जाय। लेकिन ये बात जरूर है कि हमारे देश की सरकार इस पर गंभीरता से सोच कर ठोस कदम उठाये, वरना देश की सम्प्रभुता एवं अखंडता दोनों ही खतरे में पड जायेगी। खंड-खंड होने के कगार पर पडोसी मुल्क पाकिस्तान का एक ही उद्देश्य है कि हम तो डूबेंगे सनम, तुमको को भी ले डूबेंगे। इसी कहावत को चरितार्थ करने में जुटा है।

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